विश्वास – भरोसा – Trust

अभी पिछले दिनों मैंने मेरी पत्नी को बच्चों से यह कहते सुना की बेटा किसी पर भी Blind Trust मत करो। मैंने वहीं उसे रोका और कहा देखो Blind Trust जैसी कोई चीज़ नहीं होती। या तो Trust विश्वास करो या मत करो। क्यूँकि मेरी समझ में यह अधूरा विश्वास ही विश्वासघात का बीज है। अधूरे विश्वास के बीज से ही विश्वासघात का पौधा अंकुरित होता है और फिर धीरे धीरे पूरा पेड़ बन जाता है। मेरे पास मेरी बात का कोई Scientific वैज्ञानिक प्रमाण तो नहीं है पर मैंने अपने अनुभव से यही जाना है। 

देखिए हमारा पूरा जीवन एक विश्वास के सहारे चल रहा है Life is Uncertain पर जब हम रात को सोते हैं तो हमें विश्वास होता है की सुबह उठेंगे इसी विश्वास के सहारे हम सो जाते हैं। अगर आप को सुबह उठने का विश्वास ना हो तो आप सो ही नहीं सकते आप अपने को किसी अदृश्य शक्ति के हाथ सौंप के सो जाते हैं और शतप्रतिशत तो नहीं पर अधिकतर सुबह जीवित उठ भी जाते हैं। 

आपने अक्सर सुना होगा की साहब आजकल आप किसी के ऊपर विश्वास नहीं कर सकते और अच्छे बुरे आदमी की पहचान का मापदंड भी यही होता है की फ़लाँ आदमी भरोसे के लायक है अच्छा आदमी है मानो अच्छे बुरे का मापदंड यही हो He/She is Trustworthy

अब इसी बात को मैं एक अलग तरीक़े से सामने रखता हूँ। देखिए जितने भी दो नम्बर के काम होते हैं मतलब गोरखधंधे Illegal Activities ग़ैरक़ानूनी काम फिर वह चाहे व्यापारिक हों चाहे असामाजिक चाहे देशविरोधी चाहे आपराधिक चाहे आतंकवाद ही क्यूँ ना हों सब की रीड़ की हड्डी विश्वास भरोसा Trust ही है। वहाँ कुछ भी लिखा पढ़ा नहीं जाता सब भरोसे पे किया जाता है। जहाँ एक भी कड़ी भरोसा तोड़ देती है सारा खेल बिगाड़ जाता है अब इसका यही अर्थ निकलता है ना की बुरे लोग भी भरोसे के क़ाबिल होते हैं बल्कि वह तो सारा काम ही एक दूसरे के भरोसे करते हैं विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताक़त है। जैसे जब कोई किसी को रिश्वत देता है तो कोई रसीद मिलती है? क्या नहीं। बस भरोसा होता है की जिस भी ग़लत सही काम के लिए रिश्वत दी जा रही है वह हो जाएगा।  

तो अब सवाल यह उठता है की क्या विश्वसनीयता Trustworthiness ही किसी व्यक्ति के अच्छे या बुरे होने का मापदंड है मेरी समझ में विश्वसनीयता Trustworthiness ही किसी व्यक्ति के अच्छे या बुरे होने का मापदंड नहीं हो सकती। मेरी समझ में तो ग़ैरक़ानूनी काम करने वाले लोग एक दूसरे पर ज़्यादा विश्वास करते हैं पर उनका वह विश्वास उनका Trustworthy होना हमारे देश, समाज और दुनिया के लिए सही नहीं हो सकता।

मेरी समझ में आप किसी पर विश्वास या तो करें या ना करें किसी पर भी विश्वास नहीं करना चलेगा पर आधा अधूरा विश्वास नहीं चलेगा यदि आप बिना किसी पर बिना किसी Precondition के विश्वास करते हैं तो चाहे वह व्यक्ति किसी का भी विश्वास तोड़े आप का नहीं तोड़ेगा और मैं यक़ीन से कह सकता होन की आप ने यह अनुभव भी किया होगा Precondition से मेरा मतलब है की मेरा भाई, मेरी बीवी है मेरा दोस्त है मैंने इसकी बहुत मदद की है वग़ैरह वग़ैरह आपको विश्वास करना है तो बस कोरा विश्वास Plain and Simple Trust हल्का सा भी शक नहीं चलेगा इस तरह के अटूट विश्वास को तोड़ने के लिए बहुत ताक़त लगती है बहुत मुश्किल है ऐसा भरोसा तोड़ना किसी के लिए उदाहरण के तौर पर यदि आप अपने ड्राइवर पर अधूरा विश्वास करते हैं तो मान लीजिए उसे इसकी भनक मिल जाएगी और उसके अंतरमन में यह विचार उठेगा की यार विश्वास तो वैसे भी नहीं करते तो तोड़ भी दूँगा तो ग़लत क्या है आप के अधूरे विश्वास के बीज से ही विश्वासघात का पौधा आप के ड्राइवर के मन में अंकुरित होगा। वैसे आप इस बारे में मेरा एक और ब्लॉग भी पढ़ सकते हैं क्या भगवान भरोसे रहा जा सकता है

अगर हो सके तो आप भी Experiment करके देखिए और बताइए कैसा अनुभव रहा।             

 

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