नकारतमकता और सकारात्मकता

नकारतमकता यानी negativity से हम राई का पहाड़ बना सकते हैं तो कोशिश कीजिए सकारात्मक positive सोच रखने की हमेशा ऐसा शायद सम्भव ना हो पर जहाँ तक हो सके प्रयास कीजिए आप positive रहें और positive energy release करें अच्छी vibes release कीजिए अच्छा सोचोगे अच्छा होगा और बुरा सोचोगे बुरा होगा

नकारतमकता का एक उदाहरण देता हूँ मेरे एक मित्र हैं अगर दाल में एक भी कंकर होगा तो वह उन्ही की कटोरी में आएगा अगर कमरे में एक भी मच्छर होगा तो उन्हें ही कटेगा ऐसा क्यूँ?

मैंने हाल ही में इसका विश्लेषण किया असल में हम जिसे ढ़ूढ़ रहे होते हैं वह भी हमें ढ़ूढ़ रहा होता है अब जैसे ही वह मित्र खाना खाने बैठते हैं तो सोचते हैं की कहीं इस दाल में कोई कंकर इत्यादि तो नहीं है अब अगर पूरी दाल में एक भी कंकर है तो उस कंकर को यह बात बहुत भाती है की आया कोई कदर्दान जो मुझे ढ़ूढ़ रहा है और वह कंकर सीधे उस मित्र की दाल की कटोरी की और चल पड़ती है की लो हुज़ूर आदाब अर्ज़ है

यही मच्छर के विषय में होता है एक भी मच्छर उस मित्र को इस लिए काट लेता है क्यूँ की वह मित्र जहाँ भी जाते हैं यही सोचते हैं की यहाँ कोई मच्छर ना हो अब मच्छर इस अनजाने प्रेम से मंत्रमुगध हो जाता है और पहुँच जाता है लो जी तुमने बुलाया और हम चले आए दिल और जान हथेली पर ले आए

जीवन है तो सुख दुःख तो लगा ही रहेगा धूप छांव और कभी अंधकार है ये ज़िन्दगी पर देर सवेर उजाला होता ही है अगर आप सकारात्मक रहें तो बस मूलमंत्र यही है की आप वही आकर्षित करें जो आप चाहते हैं

प्रयास कीजिए मैं भी कर रहा हूँ मेरी शुभकामनाएँ आप के साथ हैं

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