यहाँ सब किरायेदार हैं

ये ज़िन्दगी हमें किराए पे ही तो मिली है और हम ख़ुद को इसके मालिक समझ बैठते हैं। मेरी समझ में बस यहीं भूल हो जाती है। जैसे हम लोग जब किराए के मकान में रहते हैं तो मालूम होता है की कभी भी ख़ाली करना पड़ सकता है। ना मालूम मकान मालिक कब नोटिस थमा दे की चलिए साहब ख़ाली कीजिए हमारा मकान। और इसी वजह से हम किराए के मकान मैं ज़्यादा सामान नहीं जुटाते। ताकि ख़ाली करते समय अधिक सामान ना ढोना पड़े और भी कई कारण होते हैं जिनकी आप सभी को समझ है।

ऐसे ही इस किराए की ज़िन्दगी को भी किराएदार की तरह ही जीना चाहिए कम से कम सामान। क्योंकि क्या पता कब नोटिस थमा दिया जाए की चलो ख़ाली करो इस देह रूपी मकान को। तो जब यह देह रूपी मकान अपना है ही नहीं और इसे ख़ाली करना है एक ना एक दिन तो फिर जितना बोझ सामान का कम होगा इसे ख़ाली करना उतना आसान होगा। अब ये बोझ जो हम काम, क्रोध, मोह, लोभ और अहंकार से पैदा करते हैं इसे जितना कम रख सकें उतना अच्छा रहेगा। ख़ाली हाथ हो सकें तो सबसे अच्छा क्यूँकी यहाँ कोई दूसरा मकान मिलेगा या नहीं कुछ नहीं पता। इस देह रूपी मकान को छोड़ कर यह आत्मा कहाँ जाती है क्या पता।शायद सही सही किसी को नहीं पता। तो जब ख़ाली हाथ आए हैं और ख़ाली हाथ ही जाना है तो सामान ना ही हो तो सही रहेगा

एक वो गाना भी तो है ना “खाली हाथ आए थे हम खाली हाथ जाएँगे”

एक पल का जीना फिर तो है जाना

तोहफा क्या ले के जाइए दिल ये बताना

खाली हाथ आए थे हम खाली हाथ जाएँगे

बस प्यार के दो मीठे बोल झिलमिलाएँगे

तो हंस क्यूँ की दुनिया को है हँसाना

ऐ मेरे दिल तू गाए जा

तो बस हँसते हँसाते ख़ाली हाथ ही निकलने में भलाई है और हाँ इस किराए के मकान की एक और ख़ासियत है की मकान मालिक किराया भी नहीं माँगता और हम सब समझते हैं की अगर कोई हमसे किसी काम के किसी चीज़ के किसी मदद के पैसे नहीं लेता तो हम किसी ना किसी तरह उस अहसान को उतारने का प्रयास करते हैं। तो इस मकान मालिक रूपी भगवान का भी तो अहसान चुकाना बनता है बोलिए मित्रों बनता है की नहीं बनता है ज़रा ऊपर हाथ उठा के बोलिए मित्रों बनता है की नहीं बनता है बनता है। तो जब बनता है तो बस उस मकान मालिक का भगवान का परमात्मा का हर पल हर घड़ी शुक्रिया कीजिए कुछ देर रोज़ उसका एकांत में बैठ के ध्यान कीजिए शुक्रिया कीजिए और इस मकान मालिक से अपने सम्बंध सुधारिए और मज़बूत कीजिए हो सकता है आप की थोड़ी बहुत लिहाज़ ही कर दे अब क्या लिहाज़ करे ये उसकी मौज है।

ऐसे ही कुछ भी अँटशँट लिख देता हूँ जो मन में आता है कुछ ग़लत लिख दिया हो तो सब किराएदारों और ख़ासतौर पर मकान मालिक से क्षमा माँगता हूँ। प्रभु हम पे दया करना प्रभु हम पे कृपा करना।

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