मीडिया ट्राइयल-ज़िम्मेवार कौन

हमारे पत्रकार आख़िर साबित क्या करना चाहते हैं ना किसी को चैन से जीने देते हैं और ना मरने। कई बार तो ऐसा लगता है नाहक ही हमने इतनी बड़ी न्यायिक व्यवस्था खड़ी की जिसमें न्याय मिलने में सालों लग जाते हैं जबकि हमारे पत्रकार केवल आधे या एक घंटे की बहस में दूध का दूध और पानी का पानी करने की क्षमता रखते हैं। और हम लोग भी तो यही चाहते हैं instant noodles की तरह instant justice फिर वो सही हो या ग़लत उस से क्या फ़र्क़ पड़ता है। कल कोई नया मुकदमा होगा। इस instant justice से किसका क्या नुक़सान हुआ उसकी किसको परवाह है।

समझ में आता है अगर हर पक्ष की बात एक तटस्थ neutral तरीक़े से रखी जाए और कुछ साबित करने की मंशा ना हो मतलब कोई hidden agenda ना हो पर होता क्या है ये पत्रकार कहानी को एक निर्धारित दिशा में ले जाना चाहते हैं और उसी के हिसाब से वह चलते हैं।

मुझे पत्रकार का यह फ़र्ज़ समझ में आता है की वह तथ्य जुटाए और उन्हें सब के सामने रखे और चलिए मान लेते हैं की उन तथ्यों के आधार पर अपनी राय भी रखे पर राय और फ़ैसले में तो फ़र्क़ होता है ना यह जो मीडिया ट्राइयल होता है वो तो बिलकुल भी सही नहीं है।

मैं क्यूँकि पेशे से वक़ील हूँ तो आमतौर पर मुझ से मेरी राय पूछ ली जाती है की है जी वक़ील साहब ये फ़लाँ मर्डर केस में फ़लाँ को फ़लाँ ने ही मारा था ना और साथ ही यह भी बोल देते हैं देखो जी हमें तो यही लगता है। फिर मैं अगर पूछता हूँ आप को ऐसा कैसे लगता है। तो कहेंगे लगना क्या है जी सारे अख़बार वाले न्यूज़ चैनल वाले यही कह रहे हैं और वक़ील साहब हमें तो शुरू से ही फ़लाँ पे शक था। जबकि ना तो इन्होंने कोई FIR पढ़ी होती है ना कोई chargesheet पढ़ी होती है पर पता इन्हें सारा केस होता है। मुझ से तो बस वे अपनी समझ बूझ की endorsement चाहते हैं। बस इतना ही की देखा वक़ील साहब ने भी कह दिया की हमारा शक बिलकुल सही था हमें तो जी ऐसे शुरू से ही लग रहा था की हो ना हो राम लाल का क़त्ल मनोहर ने ही किया है और देखो अब वक़ील साहब ने भी बोल दिया की हमारा शक सही था।

पर आख़िर क्यूँ करते हैं हम ऐसा? ऐसे में पत्रकारों का क्या दोष है जब यही हम पढ़ना, सुनना और देखना चाहते हैं तो हमें यही पढ़ने को, सुनने को, देखने को मिलेगा।हमें कोई हक़ नहीं है किसी के बारे में बिना पूरे तथ्य जाने कोई भी राय बना लेने का। शायद आप को जान के ताज्जुब होगा की ये मीडिया ट्राइयल कई लोगों की जान भी ले चुके हैं। वो जो सनसनी का दाढ़ी वाला है ना उसने एक नपुंसक आदमी हाँ medically impotent पर अपनी भांजी के रेप का मामला दिखाया था और बाद में वो कसे झूठा साबित हुआ वो लड़की झूठ बोल रही थी पर तब तक देर हो चुकी थी और उस बेचारे आदमी से इतनी बदनामी वो भी झूठे आरोप की वजह से सहन नहीं हुई और उसने आत्महत्या कर ली। अब अगर वो मामला थोड़ी भी जाँच के बाद TV पर आता तो मामला कुछ और होता पर यहाँ किसको पड़ी है। बस ब्रेकिंग न्यूज़ चाहिए देखिए सबसे पहले हमारे न्यूज़ चैनल पर exclusive।

शर्म भी नहीं आती इन्हें झूठ बोलते हुए। बस एक ही सुझाव है मेरा की कोई भी opinion form करने से पहले ख़ुद भी थोड़ा home work कीजिए और अगर home work नहीं कर सकते तो कम से कम opinion भी तो form मत कीजिए सुनी सुनाई बातों पे मत जाइए आज इतनी जानकारी उपलब्ध है की आप सभी पक्षों को समझ सकते हैं देख सकते हैं और अपनी reasoned opinion form कर सकते हैं बाक़ी आप की मर्ज़ी

जय हिंद

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s